Monday, 18 March 2013

                                                     
जिसके होने से खुद को मुकम्मल मानता हूँ,
खुदा के नाम पर मै सिर्फ माँ को जानता हूँ

मेरे आँसू भी उसकी आँख से निकल जाते हैँ
दुख के दरियाओँ का ऐसा समंदर जानता हूँ

वो रोज़ रात को जागती है मेरे इंतज़ार मेँ,
मैँ हूँ कि उसकी उम्र का तकाजा मानता हूँ

तू है तो है दुनिया के लिए मेरी हस्ती का सबब,
इसीलिए मैँ आज भी खुद को बच्चा मानता हूँ

अभी तेरे बाद की दुनिया का मुझे अंदाज़ा नहीँ,
नादान हूँ कि अभी तेरी कीमत नही जानता हूँ
                   ..गौरव सिंह राजपूत

Thursday, 1 November 2012

SP sarkar bilkul manmohan sarkar ki tarah hai,jaise manmohan kuch nahi bolte hai vaise akhilesh bhi kuch nahi bolte hai.