जिसके होने से खुद को मुकम्मल मानता हूँ,
खुदा के नाम पर मै सिर्फ माँ को जानता हूँ ।
मेरे आँसू भी उसकी आँख से निकल जाते हैँ
दुख के दरियाओँ का ऐसा समंदर जानता हूँ ।
वो रोज़ रात को जागती है मेरे इंतज़ार मेँ,
मैँ हूँ कि उसकी उम्र का तकाजा मानता हूँ ।
तू है तो है दुनिया के लिए मेरी हस्ती का सबब,
इसीलिए मैँ आज भी खुद को बच्चा मानता हूँ ।
अभी तेरे बाद की दुनिया का मुझे अंदाज़ा नहीँ,
नादान हूँ कि अभी तेरी कीमत नही जानता हूँ ।
..गौरव सिंह राजपूत
